नव समानुभूति संस्था द्वारा कविता समारोह का आयोजन

लखनऊ : 28 जून (त्रिवेणी न्यूज)

नव समानुभूति संस्था, लखनऊ द्वारा कविता समारोह का आयोजन महानगर सचिवालय कालोनी स्थित संस्था के अध्यक्ष मानस मुकुल त्रिपाठी के आवास पर किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार सुबोध कुमार दुबे ‘शारदानन्दन’ रहे एवं विशिष्ट अतिथि उ0प्र0 सचिवालय में वरिष्ठ अधिकारी व श्रेष्ठ साहित्यकार डॉ0 उमेश वर्मा आदित्य रहे। कार्यक्रम का आरंभ मंचस्थ मनीषी साहित्यकारो द्वारा मां सरस्वती को माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन से किया गया। मां सरस्वती की वंदना श्री सत्येन्द्र शुक्ल आचार्य द्वारा की गयी। कविता समारोह में सुबोध दुबे शारदानन्दन जी ने काव्य पाठ प्रस्तुत किया– आना है हमें न क्षणिक प्रलोभनों में, दूरगामी सुख परिणाम नये लाना है। लाना है विगत यश वैभव प्रसिद्ध सिद्ध, मातु भारती का गुणगान नित भाना है।’

सुश्री नीतू सिंह चौहान जी पढ़ा – खौलते रक्त का उबाल देखिए आप। बुजदिली त्याग कर उछाल फेकिए आप। देश धर्म के विरूद्ध हाथ यदि उठे कोई, जड़ से ही उसको उखाड़ फेकिए आप।। जिसे सुनकर उपस्थित जन समूह ने बहुत ही सराहा। आचार्य सत्येन्द्र शुक्ल जी ने अपनी चिंतनपरक कविता का पाठ किया- तुमको पाये नहीं, खुद को भी खो दिया। हमने पाया है क्या हमने क्या खो दिया। संस्था के महासचिव, अखिलेश त्रिवेदी ‘शाश्वत’ ने अपना राम और राष्ट्र पर आधारित विशेष काव्य पाठ प्रस्तुत किया- जिनके दम से है सुबह जिनके दम से शाम। विश्व मंच के निदेशक, हैं अपने प्रभु राम।। राष्ट रस काव्य पाठ सुनकर श्रोताओ द्वारा सराहा गया। श्रोताओं ने राम भक्ति धारा में गोते लगाये। संस्था के मार्गदर्शक डॉ0 उमेश वर्मा आदित्य जी न- आओ मिल प्रेम के दीपों को जलाया जाए। मिले हाथ न सिर्फ दिल भी मिलाया जाए।। श्री मानस मुकुल त्रिपाठी जी ने अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए काव्य पाठ किया- राम कण कण रमें मुक्ति के द्वार हैं। राम इस पार भी राम उस पार हैं।। उपस्थित जनसमूह का और मंचस्थ अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन संस्था महासचिव अखिलेश त्रिवेदी शाश्वत ने किया।

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