पुस्तक समीक्षा

समीक्षक – डॉक्टर रामराज भारती

कृति कार डॉक्टर नीलम रावत की कृति दस्तक क्षितिज पर (गीत/नवगीत) संग्रह में अनागत साहित्य बोध
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पुस्तक का नाम _ दस्तक क्षितिज पर(गीत/नवगीत संग्रह)
कृति कार डॉक्टर नीलम रावत प्रकाशक निखिल पेबलिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स आगरा।
प्रकाशन का वर्ष_ २०२१
मूल्य_ ₹ १५०/ मात्र
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काव्य कृति दस्तक क्षितिज पर(गीत/नवगीत)संग्रह
को इस आसय से पढ़ना शुरू किया कि एक दो दिन में पढ़ लूंगा,किंतु पढ़ना शुरू करने के पश्चात पुस्तक ने शुरुवात से अंत तक मुझे हिलने ही नहीं दिया।वास्तव में एक अच्छी कृति की यही पहचान भी है,कि पाठक को हिलने ही न दे, फेविकोल की तरह जोड़े रहे।
प्रस्तुत पुस्तक शिल्प एवं भाव दोनो ही दृष्टि से उत्कृष्ट है कवर पृष्ठ,अंदर के पृष्ठ बहुत ही अच्छे हैं। प्रकाशक, श्री मधुकर अष्ठाना,डॉक्टर शिवमंगल सिंह मंगल,डॉक्टर अशोक अज्ञानी,डॉक्टर साहबदीन “दीन” व श्री अरविंद असर की भूमिकाओं/ सारगर्भित समीक्षा एवं आत्मकथ्य के पश्चात कुछ कहने को रह ही नहीं जाता। सीमित शब्दकोश के सहारे इतना कह सकता हूँ कि यह पुस्तक विविध प्रश्नों का हल खोजती, विभिन्न झंझावातों में पतवार के साथ सारथी की भूमिका का निर्वाह करने में सफल हुई है।
कृति कार ने हिंदी साहित्य कोष में यह पुस्तक प्रदान कर नवबोध/नव संदेश देने/नए मानक स्थापित करने का कार्य किया है, गीत नवगीत स्वयं एक प्रकार से मन की थेरेपी का कार्य करते हैं गीत भी इस दृष्टि से सक्षम है। कृति कार डॉक्टर नीलम रावत ने हिंदी जगत को यह कृति प्रदान कर वास्तव में सच्चे अर्थों में कवि कर्म एवं कवि धर्म का निर्वाह किया है।
यदि अनागत साहित्य की दृष्टि से देखें तो पाते हैं कि सभी गीत/नवगीत जहां शिल्प के धनी हैं वहीं भावों के उत्थान में कोई कटौती नहीं की गई है ।चिंतन और गायन में भी श्रेष्ठ हैं, संदेश का सारबोध लिए हुए पंचशील के आदर्शों पर चलकर दबे कुचले वंचितों ,महिलाओं एवं निर्बल जनों को उठ खड़े होने एवं अपना स्थान बनाने की प्रेरणा देते है ।, कठिनता से सरलता की ओर, कष्टों से निवारण की ओर ले जाते है,आदेश न होकर संदेश का भाव लिए हुए है। कुल मिलाकर आपकी कई कविताएं अनागत की तर्ज पर हैं यथा
“इनके हाथों में पुस्तक थमाना है।
अब भाग्य इनका बदलकर दिखाना है।।”
“पाँव अंगद सा जमाना चाहती हूँ।
जोर से मैं खिलखिलाना चाहती हूँ।।”
“एक रोटी आठ टुकड़े ।
देती थी मां बांट टुकड़े ।”
“कुशल खेवैया थे नीलम मझधारों में,नौका भव सागर के पार उतारक थे।”
“लौट आए हैं खंजन सभी नीड़ में,
तेरे आने की आहट सी आने लगी।”
“जीव अचर चर के कुछ निश्चित कारण हैं।
दुख है तो भी उसके कई निवारण हैं।।
वैज्ञानिक चिंतन का पथ अपनाना है।
ज्ञान का दीप जलाना, शांति को पाना है।।”
“अक्षरो को दिव्यतम उजास दीजिए।
शब्द दीप को प्रबल प्रकाश दीजिए।।”
“सीखते हैं लोरियों से,जिंदगी के स्वर सभी।
खेलते हैं आफतों से, भागते हैं डर सभी।।”
“साथ तेरा लगता है चंदन, प्रेम पगा पवन अनुबंधन।”
इसके अतिरिक्त और भी कई प्रसंग हैं जो जीवन पथ पर प्रकाश स्तंभ की तरह हैं। कृतिकार ने कहा है धैर्य परीक्षा में चमकेगा। हाँ ज़रूर , इस पुस्तक के कतिपय अंश पाठ्य पुस्तक का भाग अवश्य बनें।यही शुभकामना है।
यह कृति वास्तव में बहुत ही प्रासंगिक विषयों पर प्रकाश डालते हुए विविध प्रश्नों के हल खोजने हेतु आतुर है । हिंदी साहित्य के विद्यार्थियों/सुधी पाठकों/ शोधार्थियों एवं पुस्तकालयों के लिए निश्चय ही यह कृति उपयोगी सिद्ध होगी।

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