‘लखनऊ घोषणा’ के साथ संस्थागत नेतृत्व समागम का समापन हुआ

लखनऊ :17 फरवरी (त्रिवेणी न्यूज़)

लखनऊ विश्वविद्यालय में चल रहे तीन दिवसीय  शिखर सम्मेलन का आज  वाल्मिकी मंडप में  समापन कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की भूमिका में बिहार के राज्यपाल महामहिम राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर शामिल हुए।  विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के महासचिव प्रोफेसर नरेंद्र कुमार तनेजा, इसी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष  प्रोफेसर कैलाश चंद्र शर्मा और लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति  प्रोफेसर आलोक कुमार राय भी समापन समारोह में मंचासीन थे। संचालन हिंदी विभाग की वरिष्ठ शिक्षिका प्रोफेसर अलका पांडे ने किया।

लखनऊ चार्टर की प्रति के साथ मंचासीन विशिष्ट गण.

पारंपरिक दीप प्रज्वलन के बाद कार्यक्रम का शुभारंभ लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार राय के स्वागत भाषण के हुआ। उन्होंने व्यक्तियों को सीमाओं से मुक्त करने में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया और यूजीसी श्रेणी I में प्रवेश करने की लखनऊ विश्वविद्यालय की हालिया उपलब्धि पर प्रकाश डाला।

प्रोफेसर तनेजा ने छात्रों के आध्यात्मिक विकास के महत्व पर जोर दिया और शिखर सम्मेलन में 55 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की सफल भागीदारी की सराहना की, जिसकी परिणति महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल करते हुए लखनऊ घोषणा के निर्माण में हुई।

प्रोफेसर कैलाश चंद्र ने लखनऊ घोषणा में पांच बिंदुओं पर प्रकाश डाला, जिसमें उच्च शिक्षा के विकास और वृद्धि के लिए सहयोग को आवश्यक बताया गया।

मुख्य अतिथि महामहिम राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने अपने संबोधन में इस कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन करने के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय की सराहना किया । उन्होंने आजादी के बाद विदेशियों की नकल करके भारतीय शिक्षा पद्धति से भारतीय जीवन मूल्यों को धीरे-धीरे हटाने पर चिंता व्यक्त किया। उन्होंने विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान की इस बात के लिए सराहना किया कि यह संस्था भारतीय जीवन मूल्यों को पुनः स्थापित करने के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा कि शिक्षित या सक्षम बनने के पहले मनुष्य को अच्छा इंसान बनना चाहिए। मानवीय जीवन मूल्यों के साथ ही देशवासी अपने कर्तव्यों का सम्यक निर्वहन कर सकेंगे और देश की उन्नति में सहायक सिद्ध होंगे। इसी कार्यक्रम में उन्होंने लखनऊ चार्टर का विमोचन किया और कुछ चुने हुए संस्थाओं के मुखिया को की प्रतियाँ भेंट किया।

कार्यक्रम का समापन लखनऊ विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर राकेश द्विवेदी के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।

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