समाजशास्त्र विभाग में राष्ट्रीय कार्यशाला

लखनऊ :13  मार्च (त्रिवेणी न्यूज़)

लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग में मंगलवार को आईसीएसएसआर नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया । कार्यशाला का आयोजन समाजशास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय की सह आचार्य डॉक्टर प्रतिभा राज द्वारा किये गये प्रोजेक्ट कार्य के परिणामों को साझा करने के लिए किया गया था।
कार्यशाला के कार्यक्रम कुछ इस प्रकार रहे-


प्रोफेसर रिपु सूदन ने अपने वक्तव्य में योजनाओं का समालोचनात्मक मूल्यांकन तथा अकादमी क्षेत्र का योगदान क्या है एवं योजनाओं का अध्ययन क्यों जरूरी है और प्रोफेसर उदय भान सिंह ने अपने वक्तव्य में आम आदमी के क्रय शक्ति अथवा क्षमता को ही अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक कहा तथा उद्योग से संबंधित कौशल को आम आदमी से जोड़ने के महत्व को समझाया तथा युवा वर्ग को स्किल देने से रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होते हैं इसके साथ ही साथ हमें योजनाओं का इंपैक्ट तथा एसेसमेंट कितना भी खराब क्यों ना हो हमें इंपैक्ट और असेसमेंट का मूल्यांकन अवश्य करना होगा तथा इन दोनों के बीच सह संबंध बनाने से लाभ प्राप्त होगा। इसके बाद प्रोफेसर जयशंकर पांडे ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारतीय शिक्षा पद्धति में संवाद की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है और भारतीय समाज में जजमानी व्यवस्था के महत्व को उजागर किया है क्योंकि इसमें भी कुशलता और कौशल की आवश्यकता होती है ।

प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉक्टर प्रतिभा राज ने अपने प्रोजेक्ट कार्य के परिणामों को निम्न बिंदुओं के माध्यम से बताया है – रोजगार और युवाओं के मध्य संबंध तथा इस योजना का युवाओं पर क्या प्रभाव और इस योजना को पूरा करने के बाद रोजगार के क्या अवसर उपलब्ध होंगे जैसे बिंदुओं पर अपना विचार रखा और सुझाव स्थानीय जब को वरीयता देने तथा अध्ययन सामग्री की गुणवत्ता में सुधार के साथ ही साथ परिवहन जैसी मूलभूत सुविधा की भी अति आवश्यकता है। लियाकत खोखर ने अपने वक्तव्य में 12वीं पास युवा घर से बाहर नहीं जाना चाहता है तथा सरकारी नौकरी की संख्या सीमित है और निजी छात्रों में कम वेतन के मिलने के कारण कम झुकाव तथा बैंकों से ऋण मिलने में और असुविधा और लोगों में योजनाओं की प्रति कम जागरूकता देखने को मिलती है पवन मिश्रा ने अपने वक्तव्य में भारत की आजादी के बाद विकास के दो मॉडल पर चर्चा की पहली नेहरू और दूसरा गांधी तथा भारत में सभी लोगों को तकनीकी ज्ञान को अति आवश्यक बताया और बिहार के मखाना के वैश्विक पहचान को भी बताया और कार्यशाला के समापन में प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉक्टर प्रतिभा राज ने अपने अनुभव को भी साझा किया।

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