सैटरडे सेमिनार की विशेष श्रृंखला में व्याख्यान का आयोजन

लखनऊ : 23 मार्च (त्रिवेणी न्यूज़)

लखनऊ विश्वविधालय के दर्शनशास्त्र विभाग के द्वारा दिनांक 23/03/2024 को सैटरडे सेमिनार की विशेष श्रृंखला में एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया । इस व्याख्यान के प्रमुख वक्ता दर्शनशास्त्र विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर राकेश चंद्रा रहे । इस कार्यक्रम की पेट्रोन दर्शनशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्षा डॉक्टर रजनी श्रीवास्तव थी। कार्यक्रम का प्रारम्भ दर्शनशास्त्र विभाग की शोध छात्रा मानसी वैश्य के द्वारा वक्ता के स्वागत के साथ किया गया । उनके व्याख्यान का विषय ‘कृतिम बुद्धिमत्ता एवं नैतिकता’ था। उन्होंने कृतिम बुद्धिमता को परिभाषित करते हुए अपने व्याख्यान के माध्यम से वर्तमान परिपेक्ष में कृतिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते स्वरुप एवं उसके सामाजिक, आर्थिक एवं नैतिक प्रभाव को समझाने का प्रयास किया । उनके अनुसार कृतिम बुद्धिमत्ता का विकास बीते कुछ वर्षों में इतनी तेजी से हुआ है जिसके चलते प्रत्येक मानव की दैनिक दिनचर्या में बहुत तेजी से परिवर्तन हुए है । लेकिन परिवर्तन की इस श्रृंखला में बहुत सारे प्रश्न निकल कर सामने आते हैं जो कि कृतिम बुद्धिमत्ता के सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों प्रभावों के ऊपर व्यक्ति विशेष को सोचने के लिए बाध्य करते हैं । कृतम बुद्धिमत्ता के नकरात्मक प्रभावों को कम करने एवं इसकी सकारात्मकता को बढ़ाने के लिए हाल ही में विश्वपटल पर किये गए शोधों एवं उनके द्वारा दिए गए सुझाओं को भी अपने व्याख्यान के द्वारा बताया ।

उन्होंने अपने व्याख्यान में लोगों का इस तरफ भी ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया कि जब हम कृतृम बुद्धिमता के माध्यम से किसी अविष्कार को जन्म देने का प्रयास करते हैं तो हमें यह विशेष ध्यान देने की अवश्यकता है कि इसका स्वरुप नैतिक एवं वैधानिक होना चाहिए जिससे कि इसके द्वारा प्राप्त परिणामों से सामाज का नैतिक ढांचा एवं किसी व्यक्ति विशेष के किसी भी अधिकार का उल्लंघन न हो । हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा की इसके द्वारा प्राप्त परिणाम किसी पूर्वाग्रह या किसी संकुचित मानसिकता के द्वारा प्रभावित न हो । इसके द्वारा प्राप्त परिणाम पूर्णरूप से पारदर्शी हों एवं समाज में समानता का अनुशरण करते हों । अपने व्याख्यान में उन्होंने सबसे ज्यादा इस बात पर प्रभाव डाला कि इसके द्वारा प्राप्त परिणामों की जवाबदेही उस मशीन की न होकर उसे बनाने वाले व्यक्ति की होनी चाहिए जिससे की उसके द्वारा प्राप्त परिणाम ज्यादा सकारात्मक हों । हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि मशीन व्यक्ति के ऊपर हावी न हो जाये इस लिए हमें उन चीजों का भी पूर्ण ख्याल करना होगा जिससे की कृतिम बुद्धिमता सदैव मानव के नियंत्रण में रहे ।कार्यक्रम में विभाग की विभागाध्यक्षा रजनी श्रीवास्तव के साथ साथ विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर प्रशांत शुक्ला एवं डॉक्टर राजेश्वर प्रसाद उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विभाग के शोध छात्रों के साथ साथ स्नातक , परस्तानक के छात्र सामिल रहे। विश्वविद्यालय के अन्य विभागों के भी प्रोफेसर्स कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। व्याख्यान के अंत में प्रश्न उत्तर सत्र हुआ जिसमें शोध छात्रों ने अपने प्रश्नों को पूछा और डॉक्टर राजेश्वर प्रसाद यादव एवं डॉक्टर प्रशांत शुक्ला ने व्याख्यान के ऊपर अपने अनुभवों एवं टिप्पड़ियों को साझा किया ।

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