लखनऊ विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में गर्भ संस्कार पर पहला शोध प्रबंध

लखनऊ : 4 अप्रैल (त्रिवेणी न्यूज़)

लखनऊ विश्वविद्यालय, मनोविज्ञान विभाग की पीएचडी वि‌द्यार्थी, प्रज्ञा वर्मा (लाइसेंस प्राप्त, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट) द्वारा एक शोध किया गया है। यह शोध डॉ. अर्चना शुक्ला, विभागाध्यक्ष के पर्यवेक्षण में पूर्ण हुआ। इस शोध का शीर्षक (टॉपिक) “ए स्टडी ऑफ़ स्ट्रैंथनिंग मदर-फीटस बॉन्डिंग एमंग प्रेगनेंट वूमेन थ्रू प्रेनाटल एजुकेशन ऑन गर्भ संस्कार (A Study of strengthening Mother Fetus bonding among pregnant women through prenatal education on Garbh Sanskar) है।

इस शोध में गर्भसंस्कार के आधार पर गर्भवती महिलाओ की काउंसलिंग की गई। यह शोध गर्भवती महिलाओ में होने वाले बच्चों के प्रति लगाव को बढ़ाने और गर्भवती महिलाओ के पूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में कारगर साबित हुआ है।

इस शोध के प्रथम चरण में गर्भावस्था के चौथे महीने में गर्भ धारण करने वाली 100 गर्भवती महिलाओं को अध्ययन में शामिल किया गया। महिलाओ का उनके बच्चे के प्रति लगाव, उनके मानसिक स्वास्थ्य और उनके होने वाले बच्चे के प्रति उनकी क्या सोच थी उसका आकलन किया गया, जिसने ये पाया कि कुछ महिलाओं में अजन्मे बच्चे के लिए लगाव कम था, क्योंकि वो ये सोचती थी कि उनके होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य में सिर्फ दूसरे की बताई गई सलाह या उनके डॉक्टरों की बताई गई दवाओ का ही असर पड़ता है। इस कारण वे स्वयं अपने बच्चे के प्रति कोई भी प्रयास करना जरूरी नहीं समझती थी।

इस शोध के दूसरे चरण में 30 गर्भवती महिलाओ का चयन किया गया और उन्हें इंटरवेंशन दिया गया क्योंकि उनका अपने भ्रूण से लगाव कम था। इसके कारण उन महिलाओ को गर्भ संस्कार सिखाया गया। जिसमें महिला को गर्भस्थ अवस्था के दौरान अपनी जीवन शैली में कुछ बदलाव करने को बताया गया। इसमे महिला की गर्भ की आयु के अनुसार से अलग-अलग योग, अलग-अलग संगीत, महिला में अलग-प्रकार का पौष्टिक आहार, मंत्र उच्चारण वा ईश्वर से प्रार्थना वा पूजा करना, प्रतिदिन अपने आप को साकारात्मक रखना सिखाया गया, अथवा गर्भ संवाद करना भी सिखाया गया।

इस के पश्चात तीसरे चरण में इन 30 महिलाओं की जांच की गई, और ये पता लगा कि गर्भ संस्कार देने से गर्भवती महिला के मानसिक स्वास्थ्य में सकारात्मक परिवर्तन आया, ये सभी क्रियाओं को निरंतर करने से महिलाओ के सकल स्वास्थ्य में लाभ मिला और गर्भवती महिलाओं का उनके बचे के प्रति लगाव बढ़ा जिस से अपना और अपने बच्चे का विकास बेहतर ढंग से किया। अपनी गर्भ अवस्था को प्रसन्न रहकर पूर्ण कर पाई और एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देने में सफल हो सकी। ये शोध 3 साल 3 महीने में पूरा हो गया। लखनऊ विश्वविद्यालय में गर्भ संस्कार पर यह पहला शोध प्रबंध है।

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