
राजनांदगांव 23/9/2026/। इन दिनों स्कूल जाने वाले बच्चों में सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में खराश और बुखार की शिकायत काफी देखने को मिल रही है। मौसम में बदलाव के साथ बच्चों में वायरल संक्रमणों के मामले बढ़ना आम बात है। स्कूलों में बच्चों का एक-दूसरे के निकट रहना भी संक्रमण के प्रसार का एक महत्वपूर्ण कारण है।
इसी दौरान Influenza (फ्लू) के मामले भी सामने आ रहे हैं। Influenza एक संक्रामक श्वसन संक्रमण है, जो मुख्य रूप से Influenza A और Influenza B वायरस के कारण होता है। सामान्य लक्षणों में अचानक बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, सिरदर्द, थकान तथा शरीर में दर्द शामिल हो सकते हैं। छोटे बच्चों में कभी-कभी उल्टी या दस्त भी साथ में हो सकते हैं।
मेडिकल कॉलेज में मिले Influenza के मामले
हमारे मेडिकल कॉलेज अस्पताल, राजनांदगांव के शिशु रोग विभाग में जांच के दौरान अब तक निम्न Influenza-positive मामले पाए गए हैं:
• H1N1 – 4 मामले
• H3N2 – 1 मामला
• Influenza B – 1 मामला
• Influenza A – 2 मामले
अर्थात विभाग में विभिन्न प्रकार के Influenza के कुल 8 positive cases सामने आए है.
हमारे मेडिकल कॉलेज में Swine Flu/Influenza के लिए अलग Isolation Ward संचालित है, जहां आवश्यकता के अनुसार मरीजों को पृथक रखकर उपचार और निगरानी की जाती है।
अभी तक किसी भी बच्चे की मृत्यु नहीं हुई है।
यह निश्चित रूप से राहत की बात है। साथ ही, अभिभावकों को यह समझना जरूरी है कि Influenza अधिकांश बच्चों में नियंत्रित हो जाता है, लेकिन छोटे बच्चों तथा पहले से किसी बीमारी से ग्रसित बच्चों में जटिलताओं का जोखिम अधिक हो सकता है।
किन बच्चों में ज्यादा सावधानी जरूरी है?
विशेष सावधानी इन बच्चों में रखनी चाहिए—
• 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, विशेषकर 2 वर्ष से कम
• अस्थमा या अन्य chronic lung disease वाले बच्चे
• हृदय रोग वाले बच्चे
• Diabetes या अन्य chronic illness वाले बच्चे
• कमजोर immunity वाले बच्चे
• गंभीर बीमारी के साथ अस्पताल में भर्ती बच्चे
ऐसे बच्चों में Influenza होने पर चिकित्सकीय परामर्श जल्दी लेना चाहिए।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि बच्चे को तेज या लगातार बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी, बहुत तेज सांस चलना, छाती का अंदर धंसना, ऑक्सीजन कम होना, अत्यधिक सुस्ती, पानी/दूध नहीं पी पाना, बार-बार उल्टी, दौरा या हालत बिगड़ती हुई दिखाई दे, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
Influenza के संदिग्ध या पुष्ट मामलों में कुछ बच्चों के लिए antiviral treatment की आवश्यकता हो सकती है। यह उपचार विशेष रूप से गंभीर, progressive या high-risk मामलों में महत्वपूर्ण है और चिकित्सक की सलाह से दिया जाना चाहिए। Antiviral दवाएं लक्षण शुरू होने के शुरुआती 1–2 दिनों में शुरू होने पर सबसे अधिक प्रभावी होती हैं, हालांकि गंभीर या high-risk मरीजों में बाद में शुरू करने पर भी लाभ हो सकता है।
बच्चों को संक्रमण से कैसे बचाएं?
रोकथाम के लिए कुछ छोटी-छोटी सावधानियां बहुत महत्वपूर्ण हैं—
1. बीमार बच्चे को स्कूल न भेजें।
बुखार और सक्रिय respiratory symptoms के दौरान बच्चे को घर पर आराम दें।
2. हाथों की स्वच्छता रखें।
बच्चों को नियमित रूप से साबुन से हाथ धोने की आदत डालें।
3. खांसते और छींकते समय मुंह-नाक ढकें।
4. स्कूल और घर में ventilation अच्छा रखें।
बंद और भीड़भाड़ वाले कमरों में संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ सकती है।
5. पर्याप्त नींद, पौष्टिक भोजन और पर्याप्त तरल पदार्थ दें।
6. डॉक्टर की सलाह के बिना antibiotic न दें।
Influenza एक viral infection है और antibiotics वायरस पर काम नहीं करते।
7. Influenza vaccination के बारे में चिकित्सक से सलाह लें।
Seasonal influenza vaccination बीमारी और उसकी गंभीर complications के जोखिम को कम करने में मदद करती है।
समस्या से समाधान
सर्दी-जुकाम और Influenza के मामलों का बढ़ना अभिभावकों के लिए चिंता का कारण हो सकता है, लेकिन घबराने की आवश्यकता नहीं है। सही जानकारी, समय पर पहचान, संक्रमण से बचाव और जरूरत पड़ने पर शीघ्र चिकित्सकीय परामर्श से अधिकांश बच्चों का उचित उपचार किया जा सकता है।
माता-पिता का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है—लक्षणों को नजरअंदाज न करें, लेकिन हर सर्दी-जुकाम को गंभीर बीमारी समझकर घबराएं भी नहीं।
सावधानी रखें, सही समय पर चिकित्सकीय सलाह लें और बच्चों को स्वस्थ रखें। यही समस्या से समाधान की सही दिशा है।
डॉ. धनंजय सिंह ठाकुर शिशु रोग विशेषज्ञ एवं सहायक प्राध्यापक मेडिकल कॉलेज अस्पताल, राजनांदगांव
